चंडीगढ़। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राज्य में कृषि और उद्योग को नई दिशा देने के लिए दो अहम नीतिगत पहलों की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि हरियाणा में शीघ्र ही एक स्मार्ट एग्रीकल्चर जोन और एक स्मार्ट इंडस्ट्रियल जोन विकसित किया जाएगा, जहां किसानों और उद्योगपतियों को विशेष सुविधाएं और आधुनिक बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने यह घोषणा उद्योग एवं वाणिज्य विभाग द्वारा पिछले वर्ष की बजट घोषणाओं की समीक्षा के लिए आयोजित उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए की। बैठक में उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह भी उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने आईएमटी मानेसर, बावल और कुंडली में औद्योगिक श्रमिकों के लिए बनाए जा रहे डॉरमेट्री और सिंगल रूम आवासीय इकाइयों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों की आवासीय आवश्यकता का आकलन किया जाए। जहां भी जरूरत हो, वहां संबंधित औद्योगिक संगठनों से परामर्श कर समग्र आवासीय योजनाएं तैयार की जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कार्यस्थल के निकट किफायती आवास उपलब्ध होने से श्रमिकों को सुविधा मिलेगी और उत्पादकता भी बढ़ेगी।
बैठक में बताया गया कि 25 दिसंबर 2025 को सुशासन दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा शुरू किया गया ऑनलाइन पोर्टल, जिसके माध्यम से कम से कम 50 फैक्ट्रियों वाली अनधिकृत औद्योगिक कॉलोनियों को नियमित किया जा रहा है, उसे उद्योगपतियों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। बड़ी संख्या में उद्योगपति अपने औद्योगिक यूनिट्स का पंजीकरण कर रहे हैं। कॉलोनियों के नियमित होने के बाद उद्यमियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का समय पर लाभ मिलेगा और विभागीय औपचारिकताओं के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
मुख्यमंत्री को यह भी अवगत कराया गया कि पिछले वर्ष के बजट में की गई घोषणा के अनुरूप हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण द्वारा आवंटित औद्योगिक प्लॉट्स से जुड़े लंबे समय से लंबित मामलों का समाधान कर लिया गया है। अब इन प्लॉट्स का पूर्ण प्रशासनिक और परिचालन नियंत्रण एचएसआईआईडीसी को सौंप दिया गया है। इससे पहले उद्योगपतियों को ऑक्युपेशन सर्टिफिकेट और प्रोजेक्ट कंप्लीशन सर्टिफिकेट जैसी मंजूरियां लेने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। सरकार के इस निर्णय से उद्योग जगत को बड़ी राहत मिली है।
बैठक में यह भी बताया गया कि मुख्यमंत्री द्वारा वित्त मंत्री के रूप में पिछले बजट में ईएसआईसी अस्पतालों और डिस्पेंसरी के लिए रियायती दरों पर भूमि आवंटन की घोषणा को पूरी तरह लागू कर दिया गया है। भविष्य में एचएसवीपी, एचएसआईआईडीसी, पंचायतों या अन्य सरकारी विभागों से ईएसआईसी अस्पतालों या डिस्पेंसरी के लिए आवश्यक भूमि 75 प्रतिशत रियायती दरों पर उपलब्ध कराई जाएगी।
इसके अलावा, हरियाणा आत्मनिर्भर टेक्सटाइल पॉलिसी 2022–25 की अवधि को एक वर्ष के लिए बढ़ाकर दिसंबर 2026 तक कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पुराने औद्योगिक क्षेत्रों में, जो अब घनी आबादी वाले शहरी आवासीय क्षेत्रों का हिस्सा बन चुके हैं, वहां सीवरेज, सड़क, पेयजल आपूर्ति और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी नागरिक सुविधाओं को सुदृढ़ किया जाए।
नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने सभी औद्योगिक एस्टेट्स में इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित करने के निर्देश दिए, ताकि स्टार्टअप्स को रियायती दरों पर कार्य करने का अवसर मिल सके। अधिकारियों ने बताया कि आईएमटी मानेसर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम कंप्यूटिंग टेक्नोलॉजी के लिए तथा आईएमटी खरखौदा में इलेक्ट्रिक व्हीकल और ऑटोमोटिव सेक्टर के लिए इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित करने हेतु भूमि चिन्हित कर ली गई है। अन्य स्थानों पर भी इस दिशा में प्रक्रिया जारी है।
मुख्यमंत्री ने अन्य बजट घोषणाओं की समीक्षा करते हुए 10 नए औद्योगिक मॉडल टाउनशिप के विकास, वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट कार्यक्रम के क्रियान्वयन, आईएमटी मानेसर में जीरो वॉटर वेस्टेज इंडस्ट्रियल एरिया के पायलट प्रोजेक्ट, आईएमटी खरखौदा के विस्तार, आईएमटी अंबाला के पहले चरण के क्रियान्वयन, महेंद्रगढ़ जिले में आईएमटी की स्थापना, ‘मेक इन हरियाणा’ कार्यक्रम की शुरुआत और गुरुग्राम में सांस्कृतिक केंद्र के निर्माण जैसे कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने सरकार के संकल्प पत्र में की गई घोषणाओं की भी विस्तृत समीक्षा की और अधिकारियों को उनके शीघ्र और प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए।