हरियाणा में 590 करोड़ रुपये के बहुचर्चित बैंक घोटाले में विजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने शनिवार को पांचवीं गिरफ्तारी की। इस मामले में पहली बार किसी सरकारी अधिकारी को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार अधिकारी की पहचान नरेश कुमार भुवानी (52) के रूप में हुई है।
नरेश विकास एवं पंचायत निदेशक कार्यालय में सुपरिंटेंडेंट के पद पर तैनात था। वह चरखी दादरी जिले के जगराम बास का निवासी है और वर्तमान में मोहाली में रह रहा था।
‘स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट’ के जरिए धन की हेराफेरी का आरोप
एसीबी के अनुसार नरेश कुमार ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर “स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट” नामक फर्म बनाई थी, जिसके माध्यम से हरियाणा सरकार के खातों से धन की हेराफेरी की गई। जांच एजेंसी का दावा है कि नरेश ने न केवल सीधे इस फर्म से पैसे प्राप्त किए, बल्कि सह-आरोपियों और कुछ सार्वजनिक कर्मचारियों के बीच बिचौलिए की भूमिका भी निभाई।
करोड़ों रुपये निजी खातों में ट्रांसफर
एसीबी के मुताबिक नरेश पर आरोप है कि उसने एक निजी एजेंसी के जरिए:
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1 करोड़ रुपये सरकारी फंड अपने बैंक खाते में ट्रांसफर किए,
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10 लाख रुपये अपनी बेटी के खाते में भेजे,
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25 लाख रुपये से टोयोटा फॉर्च्यूनर कार खरीदी।
जांच में सामने आया कि उसने फर्म के खाते से 13 नवंबर को 40 लाख रुपये, 15 नवंबर को 40 लाख रुपये, और 27 नवंबर को दो बार 10-10 लाख रुपये अपने निजी खाते में ट्रांसफर किए।
पहले से चार आरोपी गिरफ्तार
इस घोटाले में पहले ही चार लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें पंचकूला सेक्टर-32 स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के पूर्व ब्रांच हेड रिभव ऋषि, पूर्व रिलेशनशिप मैनेजर अभय कुमार, अभय की पत्नी स्वाति सिंगला और उसके भाई अभिषेक शामिल हैं।
स्वाति और अभिषेक “स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट” के शेयरधारक बताए गए हैं। दोनों को सात दिन की रिमांड पर लिया गया है।
छह दिन की ACB रिमांड
नरेश कुमार को पंचकूला अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे छह दिन की एसीबी रिमांड पर भेज दिया गया। एसीबी ने अदालत को बताया कि मामले में करोड़ों रुपये के लेनदेन और डिजिटल व दस्तावेजी साक्ष्य शामिल हैं। ऐसे में सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका को देखते हुए आरोपी की हिरासत जरूरी है।
गंभीर धाराओं में मामला दर्ज
जांच एजेंसी के अनुसार नरेश ने निजी व्यक्तियों और कुछ भ्रष्ट अधिकारियों के साथ मिलकर संगठित आपराधिक साजिश रची। आरोप है कि उसने फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी खातों से धन निकालकर अपने निजी और व्यावसायिक खातों (आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, चंडीगढ़) में ट्रांसफर किया।
उस पर भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप लगाए गए हैं। एसीबी का कहना है कि सरकारी कल्याण के लिए ट्रस्ट में रखे गए धन का निजी लाभ के लिए इस्तेमाल करना गंभीर अपराध है।
आगे और गिरफ्तारियां संभव
एसीबी कई अन्य लोगों से पूछताछ कर रही है और इस मामले में आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है। जांच एजेंसी का कहना है कि घोटाले की परतें लगातार खुल रही हैं और पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाएगा।