हरियाणा सरकार ने सरकारी जमीन से जुड़े राजस्व रिकॉर्ड में पारदर्शिता और स्पष्टता लाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य की वित्त आयुक्त (राजस्व) डॉ. सुमिता मिश्रा ने निर्देश दिए हैं कि जमाबंदी रिकॉर्ड में जमीन के स्वामित्व और खेती संबंधी प्रविष्टियां अब एक मानकीकृत प्रारूप में दर्ज की जाएं।
सरकार का उद्देश्य रिकॉर्ड में मौजूद भ्रम और अलग-अलग तरीके से दर्ज प्रविष्टियों को खत्म कर प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाना है।
पुराने निर्देशों को आगे बढ़ाया गया
यह निर्णय जनवरी और जुलाई 2021 में जारी निर्देशों को आगे बढ़ाते हुए लिया गया है। उन निर्देशों में राज्य सरकार, केंद्र सरकार, बोर्ड और निगम, पंचायती राज संस्थाओं तथा शहरी स्थानीय निकायों की जमीन से जुड़े रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने पर जोर दिया गया था।
डॉ. मिश्रा ने बताया कि कई जगह स्वामित्व कॉलम में “प्रोविंशियल गवर्नमेंट” जैसे शब्द लिखे होने से वास्तविक मालिकाना हक को लेकर भ्रम पैदा होता था।
अब इस तरह दर्ज होगा जमीन का रिकॉर्ड
नए निर्देशों के अनुसार:
-
जहां भी राज्य सरकार की जमीन होगी, स्वामित्व कॉलम में “हरियाणा सरकार” लिखा जाएगा।
-
खेती या नियंत्रण कॉलम में संबंधित विभाग का नाम दर्ज किया जाएगा।
राजस्व विभाग की जमीन, जिसमें कस्टोडियन, सरप्लस या नजूल जमीन शामिल है, उसका स्वामित्व भी “हरियाणा सरकार” के नाम पर रहेगा, जबकि खेती कॉलम में राजस्व विभाग और नियंत्रण का प्रकार दर्ज किया जाएगा।
केंद्र सरकार और अन्य संस्थाओं की जमीन
नए नियमों के तहत:
-
केंद्र सरकार की जमीन के स्वामित्व कॉलम में “Central Government” दर्ज होगा और खेती कॉलम में संबंधित विभाग का नाम होगा।
-
राज्य बोर्ड और निगमों की जमीन के स्वामित्व कॉलम में उस संस्था का नाम लिखा जाएगा।
-
ग्राम पंचायत की जमीन पंचायत के नाम से दर्ज होगी।
-
पंचायत समिति और जिला परिषद की जमीन उनके संस्थागत नाम से दर्ज की जाएगी।
-
नगर निगम, नगर परिषद और नगर समितियों की जमीन भी उनके सही नाम के साथ रिकॉर्ड में दिखाई जाएगी।
नियमों के अनुसार ही होंगे संशोधन
डॉ. सुमिता मिश्रा ने स्पष्ट किया कि स्वामित्व से जुड़ी प्रविष्टियों में बदलाव हरियाणा भूमि अभिलेख मैनुअल 2013 के पैरा 7.30 और 7.42 के अनुसार ही किए जाएंगे।
उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि यदि किसी जमीन के खेती कॉलम में निजी व्यक्तियों की प्रविष्टियां मौजूद हैं, तो उन्हें कानूनी प्रक्रिया के बिना नहीं बदला जाएगा, ताकि व्यक्तिगत अधिकार सुरक्षित रहें।
सरकार का मानना है कि इस पहल से हरियाणा में सार्वजनिक जमीन के प्रबंधन में पारदर्शिता, कानूनी स्पष्टता और जवाबदेही और मजबूत होगी।