गुरुवार तक 1600 से अधिक युवा अरावली बचाव अभियान के साथ जुड़कर केंद्र सरकार को अपनी आपत्तियां भेज चुके हैं। शुक्रवार को आपत्तियां भेजने का अंतिम दिन है और अभियान से जुड़े युवाओं ने करीब पांच हजार आपत्तियां केंद्र सरकार को भेजने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
अरावली बचाओ अभियान से जुड़े युवा अरावली को नुकसान की आशंका व्यक्त कर रहे हैं। और अरावली को संरक्षित जोन से बाहर होना चिंता जनक बताते हैं। ड्राफ्ट पर सात जनवरी तक अभी आपत्ति मांगी गई हैं। इसलिए अरावली बचाओ अभियान के युवा अधिक से अधिक लोगों को अभियान के साथ जोड़कर आपत्तियां दर्ज करवा रहे हैं। ताकि अरावली को संरक्षित जोन में रखा जा सके।
अरावली बचाओ अभियान से जुड़े पर्यावरणविद सुनील बताते हैं कि युवा अरावली बचाओ अभियान से लगातार जुड़ रहे हैं। लेटइंडियाब्रीथ डोट इन/अरावली बचाओ लिंक पर हस्ताक्षर अभियान चलाया जा रहा है। अभी तक 1600 से अधिक हस्ताक्षर किए जा चुके हैं। शुक्रवार को देर रात तक इसे संमिट कर दिया जाएगा।
वर्ष 2005 से लागू एनसीआर क्षेत्रीय योजना- 2021 के तहत दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान में लगभग पूरी अरावली रेंज संरक्षित की गई है। इससे फरीदाबाद की बड़खल झील, सूरजकुंड व अन्य प्राकृतिक झीलों का संरक्षण हो रहा था। क्योकि वन संरक्षित जोन होने से अरावली में किसी भी निर्माण या खनन की अनुमति नहीं है।
हरियाणा सरकार अरावली को भूमाफिया के हवाले कर देगी। हरियाणा सरकार पहले ही सर्वोच्च न्यायालय में अरावली की परिभाषा को ही कमजोर करने का प्रयास कर रही है। सरकार अरावली में अवैध रूप से बने फार्महाउस और अन्य ऊंची-ऊंची अट्टालिकाओं को बचाने में लगी है। इस ड्राफ्ट की मंजूरी से अरावली को हरियाणा सरकार संरक्षित क्षेत्र से बाहर कर देगी। इसका खामियाजा फरीदाबाद समेत पूरे एनसीआर को भुगतना पड़ेगा।