हरियाणा में बास्केटबॉल के दो अलग-अलग हादसों में 25 और 26 नवंबर को दो किशोर खिलाड़ियों की मौत के बाद खेल विभाग सवालों के घेरे में है। हालांकि विभागीय अधिकारी अब इन घटनाओं से खुद को अलग बताते हुए दावा कर रहे हैं कि जिन स्थलों पर हादसे हुए, वे खेल विभाग के नियंत्रण में नहीं थे।
रोहतक डिवीजन की खेल उपनिदेशक सुनीता खत्री ने कहा कि रोहतक के लखन माजरा स्थित बास्केटबॉल कोर्ट पंचायत विभाग के अधीन है, जबकि बहादुरगढ़ का कोर्ट एक सरकारी स्कूल परिसर में आता है। उन्होंने बताया कि इन दोनों जगहों पर खेल विभाग की ओर से कोई प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित ही नहीं किया जा रहा था।
लेकिन हरियाणा के खेल मंत्री गौरव गौतम ने अलग रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा कि खेल नर्सरी और मैदानों की जिम्मेदारी खेल विभाग की है। उन्होंने कहा कि मामले की पूरी जांच होगी और दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
दो दिनों में दो खिलाड़ी काल के ग्रास
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25 नवंबर: लखन माजरा, रोहतक में 16 वर्षीय हार्दिक राठी की मौत, वह नेशनल सब-जूनियर चैंपियनशिप में हरियाणा का प्रतिनिधित्व कर चुका था।
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24 नवंबर: बहादुरगढ़ के खिलाड़ी 15 वर्षीय अंश (अमन) की मौत, पीजीआईएमएस रोहतक में इलाज के दौरान दम तोड़ा।
दोनों ही घटनाओं में बास्केटबॉल के लोहे के पोल अचानक गिर गए थे।
निलंबित अधिकारी का विवादित बचाव
घटनाओं के बाद सरकार ने 26 नवंबर को रोहतक जिला खेल अधिकारी (DSO) अनूप सिंह को निलंबित कर दिया। परंतु उसी दिन तैयार रिपोर्ट में उन्होंने विभाग को क्लीन चिट देते हुए लिखा कि:
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संबंधित कोर्ट ब्लॉक समिति के अधीन है
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गांव में कोई बास्केटबॉल नर्सरी स्वीकृत नहीं
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कोच की नियुक्ति नहीं, स्थानीय क्लब सदस्य द्वारा अनौपचारिक प्रशिक्षण
विवाद बढ़ाने वाली बात यह है कि यह रिपोर्ट उन्हीं के हस्ताक्षर से 26 नवंबर की तारीख में दर्ज की गई, यानी निलंबन के तुरंत बाद या उससे पहले ही उन्होंने जांच पूरी कर दी। रिपोर्ट को अगले दिन डिप्टी डायरेक्टर सुनीता खत्री ने भी स्वीकृति देते हुए पंचकूला मुख्यालय भेज दिया।
झज्जर से भी खेल विभाग ने पल्ला झाड़ा
झज्जर जिला खेल अधिकारी सत्येंद्र कुमार ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि बहादुरगढ़ स्थित शहीद ब्रिगेडियर होशियार सिंह स्टेडियम में कोई बास्केटबॉल नर्सरी नहीं चल रही थी। विभाग ने केवल कुश्ती हॉल बनवाया है, जिसकी जिम्मेदारी कुश्ती कोच के पास है।
परिवारों का आक्रोश, न्याय की मांग
अंश के पिता सुरेश कुमार ने खेल विभाग के अधिकारियों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने कहा:
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“2022 में भी इसी तरह एक खिलाड़ी घायल हुआ था, फिर भी किसी ने पोल की जांच नहीं की।”
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“मेरे बेटे की मौत लापरवाही से हुई। हमें मुआवजा नहीं, जिम्मेदारों पर एफआईआर चाहिए।”
उन्होंने सरकार की ओर से घोषित 5 लाख रुपये की वित्तीय सहायता ठुकरा दी और कहा कि सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना किसी को क्लीन चिट नहीं मिलनी चाहिए।
इन घटनाओं ने खेल बुनियादी सुविधाओं की स्थिति और खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखने वाली बात होगी कि जांच किस दिशा में जाती है और क्या इस दुखद लापरवाही के लिए जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई होती है या नहीं।