चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने हरियाणा सिविल सेवा (कार्यकारी शाखा) और संबद्ध सेवाओं की परीक्षाओं के लिए संशोधित पाठ्यक्रम (सिलेबस) को अधिसूचित कर दिया है। यह नया सिलेबस वर्ष 2007 से लागू ढांचे की जगह लेगा और 9 फरवरी 2021 की अधिसूचना को भी निरस्त करेगा। नया पाठ्यक्रम प्रारंभिक और मुख्य, दोनों लिखित परीक्षाओं पर लागू होगा।
अधिसूचना के अनुसार, संशोधित सिलेबस अगली HCS परीक्षा चक्र से लागू होगा, जिसकी अधिसूचना 7 जनवरी 2026 के बाद जारी की जाएगी। इसका उद्देश्य राज्य सिविल सेवा परीक्षा को वर्तमान प्रशासनिक, सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों के अनुरूप बनाना है।
यह अधिसूचना हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी द्वारा हरियाणा सिविल सेवा (कार्यकारी शाखा) नियम, 2008 के नियम 11(1) के तहत जारी की गई। अधिकारियों का कहना है कि इस बदलाव से परीक्षा प्रणाली को अधिक व्यावहारिक और समकालीन बनाया गया है।
प्रारंभिक परीक्षा का नया ढांचा
संशोधित संरचना के तहत प्रारंभिक परीक्षा में दो प्रश्नपत्र होंगे—
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सामान्य अध्ययन (General Studies): इसमें सामान्य विज्ञान, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय समसामयिक घटनाएं, भारतीय इतिहास एवं स्वतंत्रता आंदोलन, भूगोल, राजनीति, अर्थव्यवस्था, मानसिक क्षमता तथा हरियाणा से जुड़े विषय जैसे राज्य की अर्थव्यवस्था, समाज, संस्कृति और भाषा शामिल होंगे।
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सिविल सर्विसेज एप्टीट्यूड टेस्ट (CSAT): इसमें समझ, संप्रेषण कौशल, तार्किक क्षमता, निर्णय क्षमता, कक्षा 10 स्तर की संख्यात्मक योग्यता और डाटा व्याख्या का परीक्षण होगा।
मुख्य परीक्षा में व्यापक बदलाव
मुख्य लिखित परीक्षा के लिए सिलेबस को कई प्रश्नपत्रों में विभाजित किया गया है।
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अंग्रेजी और हिंदी: इन विषयों में गद्यांश, निबंध लेखन, व्याकरण और अभिव्यक्ति क्षमता का मूल्यांकन होगा।
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चार सामान्य अध्ययन पत्र: इनमें भारतीय एवं विश्व इतिहास, समाज, भूगोल, संविधान, शासन प्रणाली, अंतरराष्ट्रीय संबंध, आर्थिक विकास, कृषि, बुनियादी ढांचा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, आंतरिक सुरक्षा, पर्यावरण और आपदा प्रबंधन शामिल हैं।
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नैतिकता, ईमानदारी और अभिरुचि पर एक अलग पत्र होगा, जिसमें सार्वजनिक जीवन के नैतिक मूल्य, शासन में सत्यनिष्ठा, भावनात्मक बुद्धिमत्ता और नैतिक निर्णय से जुड़े केस स्टडी शामिल रहेंगे।
सभी सामान्य अध्ययन पत्रों में हरियाणा से जुड़े मुद्दों पर विशेष जोर दिया गया है।
UPSC पैटर्न से सामंजस्य
नए सिलेबस को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के पैटर्न के अनुरूप तैयार किया गया है। इसमें पुराने और बिखरे हुए विषयों को हटाया गया है, रटंत आधारित तथ्यों पर निर्भरता कम की गई है और शासन, राजनीति, अर्थव्यवस्था तथा आंतरिक सुरक्षा जैसे विषयों को एकीकृत किया गया है।
हालांकि, अधिसूचना में यह स्पष्ट किया गया है कि अंक वितरण, प्रश्नपत्रों की संख्या, मूल्यांकन प्रणाली या अर्हता मानदंड में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सुधार केवल सिलेबस की सामग्री तक सीमित है।
यह संशोधित पाठ्यक्रम भविष्य की सभी हरियाणा सिविल सेवा (कार्यकारी शाखा) और संबद्ध सेवाओं की परीक्षाओं पर लागू होगा और इसे लगभग दो दशकों में सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
अभ्यर्थियों की प्रतिक्रिया
HCS के दूसरे प्रयास की तैयारी कर रहे अंकित शर्मा ने कहा, “नया सिलेबस अधिक संरचित और आधुनिक लगता है। UPSC पैटर्न से मेल खाने के कारण तैयारी को लेकर भ्रम कम होगा।”
वहीं गुरुग्राम की तीसरी बार की अभ्यर्थी मुस्कान धनखड़ ने कहा, “पुराने विषयों को हटाना और शासन, नैतिकता व समसामयिक मुद्दों पर जोर देना सकारात्मक कदम है। इससे समझ की परीक्षा होगी, न कि केवल रटने की।”