चंडीगढ़। हरियाणा के मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini ने शुक्रवार को विधानसभा में विपक्ष द्वारा लगाए गए 5,000 करोड़ रुपये के धान खरीद घोटाले के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने विपक्ष से कहा कि यदि उनके पास कोई ठोस सबूत है तो वह सदन के पटल पर रखें, निराधार आरोप लगाकर जनता और विधानसभा को गुमराह न करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष के पास उठाने के लिए कोई ठोस मुद्दा नहीं है, इसलिए वह 5,000 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का हवाला देकर सदन को भ्रमित करने का प्रयास कर रहा है।
कांग्रेस और इनेलो ने दिया था ध्यानाकर्षण प्रस्ताव
कांग्रेस विधायक बी.बी. बत्रा और अशोक अरोड़ा ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए आरोप लगाया था कि राइस मिलर्स, आढ़तियों, परिवहन ठेकेदारों और सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से 5,000 करोड़ रुपये का धान घोटाला हुआ है। इनेलो के आदित्य देवीलाल और अर्जुन चौटाला ने भी संबंधित मुद्दे पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव दिया था। विधानसभा अध्यक्ष ने दोनों प्रस्तावों को एक साथ लेकर सरकार से जवाब मांगा।
सदन में बोलते हुए कांग्रेस के अशोक अरोड़ा ने इस कथित घोटाले की जांच हाईकोर्ट के मौजूदा जज या सीबीआई से कराने की मांग की।
केंद्र के दिशा-निर्देशों के अनुसार होती है खरीद: सैनी
मुख्यमंत्री सैनी ने स्पष्ट किया कि हरियाणा में धान की खरीद भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार अधिकृत एजेंसियों के माध्यम से की जाती है और इस पूरी प्रक्रिया की बहुस्तरीय निगरानी की जाती है। उन्होंने कहा कि 5,000 करोड़ रुपये के घोटाले का दावा पूरी तरह तथ्यहीन है।
उन्होंने बताया कि यदि कहीं फर्जी पर्चियां, डुप्लीकेट एंट्री या अन्य अनियमितताएं पाई गई हैं तो सरकार ने त्वरित और सख्त कार्रवाई की है। अक्टूबर और नवंबर 2025 के दौरान सभी जिलों में संयुक्त समितियां गठित कर राइस मिलों में रखे धान का भौतिक सत्यापन कराया गया।
जहां प्रथम दृष्टया अनियमितताएं मिलीं, वहां संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों, आढ़तियों और राइस मिलर्स के खिलाफ 12 एफआईआर दर्ज की गईं। जांच निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से की जा रही है और कई आरोपियों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है।
75 अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई, 28 निलंबित
मुख्यमंत्री ने बताया कि खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, खरीद एजेंसियों और मार्केटिंग बोर्ड ने 75 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की है, जिनमें से 28 को निलंबित किया गया है। राइस मिलर्स से 6.38 करोड़ रुपये की वसूली कर सरकारी खजाने में जमा कराए गए हैं।
संदिग्ध धान उठान से जुड़े मजदूर, लिफ्टिंग और परिवहन ठेकेदारों के भुगतान रोक दिए गए हैं और उनकी भूमिका की जांच जारी है। उन्होंने कहा कि यह दर्शाता है कि सरकार किसी भी स्तर पर लापरवाही या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं करती।
ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल होगा अपग्रेड
मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि भविष्य में अनियमितताओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल को व्यापक रूप से अपग्रेड किया जा रहा है। रबी और खरीफ विपणन सीजन 2026-27 से जियो-टैग्ड गेट पास, वाहनों के लिए ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन सिस्टम, मंडियों, गोदामों और राइस मिलों की जियो-फेंसिंग तथा प्रवेश और निकास बिंदुओं पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।
इसके अतिरिक्त किसानों का बायोमेट्रिक सत्यापन और मोबाइल एप के माध्यम से भौतिक निरीक्षण की व्यवस्था लागू की जाएगी। जियो-फेंसिंग ढांचे के भीतर ही भौतिक सत्यापन सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि कागजी औपचारिकताओं या हेरफेर की संभावना समाप्त हो सके।
‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर होता है पंजीकरण
मुख्यमंत्री ने बताया कि किसान अपनी फसल का पंजीकरण ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर करते हैं, जिसकी विधिवत जांच कर बोए गए रकबे और उत्पादन का आकलन किया जाता है। इसलिए यह आरोप गलत है कि पोर्टल पर कोई प्रभावी सत्यापन तंत्र नहीं है।
उन्होंने सदन को बताया कि खरीफ सीजन 2025-26 के दौरान राज्य की खरीद एजेंसियों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 3 लाख से अधिक किसानों से 62 लाख मीट्रिक टन से अधिक गैर-बासमती धान की खरीद की।
आंकड़ों पर आधारित है खरीद नीति
मुख्यमंत्री ने कहा कि खरीद नीति पूरी तरह डेटा आधारित है। मंडियों में फसल आगमन के आंकड़े अनुमानित होते हैं, जबकि खरीद के आंकड़े सफाई और तौल के बाद वास्तविक माप के आधार पर दर्ज किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि 30 से 50 प्रतिशत अंतर के आरोप पूरी तरह निराधार हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि भारत सरकार ने राज्य को 8 लाख मीट्रिक टन कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) का लक्ष्य दिया था, जिसे लगभग हासिल कर लिया गया है और भारतीय खाद्य निगम को समय पर आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।