रोहतक — अंतरराष्ट्रीय नशा विरोधी दिवस के अवसर पर रोहतक में जिला प्रशासन और विभिन्न संस्थानों द्वारा जनजागरूकता अभियान और हस्ताक्षर अभियान का आयोजन किया गया। इन अभियानों का उद्देश्य समाज को नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराना और एक नशामुक्त राज्य की दिशा में जनसहयोग सुनिश्चित करना था।
जिला उपायुक्त धर्मेंद्र सिंह ने इस अवसर पर जिलेवासियों से अपील की कि वे नशे के खिलाफ चल रही मुहिम में सक्रिय भागीदारी करें। उन्होंने कहा, “हर नागरिक को चाहिए कि नशा मुक्ति के प्रयासों को गति देने के लिए अपना सहयोग दें, ताकि एक स्वस्थ और सुरक्षित समाज की स्थापना की जा सके।”
जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण (DLSA) द्वारा भी जिला एवं सत्र न्यायाधीश नीरजा कुलवंत कालसन के मार्गदर्शन और DLSA की सचिव-सह-मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी डॉ. तरन्नुम खान की निगरानी में विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए।
प्राधिकरण ने नागरिकों को यह जानकारी दी कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) द्वारा संचालित हेल्पलाइन नंबर 15100 पर किसी भी समय मुफ्त कानूनी सहायता प्राप्त की जा सकती है।
इस वर्ष का नशा विरोधी दिवस का विषय रहा — “नशे की कड़ी तोड़ो, संगठित अपराध रोको”। इसके तहत पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, रोहतक के मानसिक स्वास्थ्य संस्थान ने भी विशेष जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया।
PGIMS के ओपीडी परिसर में राज्य नशा उपचार केंद्र द्वारा एक सहायता डेस्क और फोटो प्रदर्शनी लगाई गई, जहाँ आम नागरिकों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी दी गई।
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के वरिष्ठ रेज़िडेंट डॉ. ऋत्विक गुप्ता ने कहा, “नशे से मुक्ति का सबसे पहला कदम है व्यक्ति का स्वयं से संकल्प लेना। जब तक मन से नशा छोड़ने का निश्चय नहीं होगा, तब तक कोई उपचार कारगर नहीं हो सकता।”
इन प्रयासों के माध्यम से प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट संदेश दिया कि नशे के खिलाफ जंग केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि जनसहभागिता से ही जीती जा सकती है।