पूर्व वित्तमंत्री परमिंदर ढींडसा ने शिअद विधायक दल के नेता पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने शुक्रवार को पार्टी प्रधान सुखबीर बादल को संक्षिप्त इस्तीफा भेजा, जिसमें पद छोड़ने की कोई वजह नहीं लिखी है। सुखबीर ने इस्तीफा स्वीकार कर साहनेवाल के विधायक शरनजीत ढिल्लों को विधायक दल का नेता नियुक्त किया है।
हाल ही में परमिंदर के पिता और सांसद सुखदेव सिंह ढींडसा ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बगावती सुर बुलंद किए थे। ढींडसा ने सुखबीर बादल के नेतृत्व पर खुलेआम सवाल खड़े किए थे। तीसरी बार पार्टी प्रधान के तौर पर सुखबीर की नियुक्ति पर भी उन्होंने एतराज जताया था। ढींडसा ने एलान किया था कि जल्द ही वह पार्टी को बादलों के चंगुल से आजाद कर इसका गौरव बहाल करेंगे।
ढींडसा काफी समय से सुखबीर के नेतृत्व को चुनौती दे रहे थे। बरगाड़ी कांड पर जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट आने के बाद शिअद पर लगे आरोपों के बाद वे खासे मुखर हो गए थे। कुछ दिन पहले उन्होंने खुले तौर पर पार्टी नेतृत्व को चुनौती दे दी थी। उसके बाद से ही परमिंदर ढींडसा के भविष्य को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं।
बड़े ढींडसा ने एलान किया था कि उनका बेटा साथ है, पर परमिंदर का कोई बयान नहीं आया था। 14 दिसंबर 2019 को पार्टी के 99वें दिवस समागम से परमिंदर की गैर-मौजूदगी पर सवाल उठे तो सुखबीर ने कहा कि वह इजाजत लेकर कुछ काम से मुंबई गए हैं। लेकिन पिता की बगावत के बाद से परमिंदर ने सार्वजनिक तौर पर कोई बयान नहीं दिया था।
शिअद प्रवक्ता डॉ. दलजीत चीमा ने कहा कि ढींडसा का इस्तीफा स्वीकार करने के बाद विधायकों से राय लेकर शरनजीत ढिल्लों के नेता बनाया गया है। विधायकों का मानना है कि कोई भी पार्टी से बड़ा नहीं है, हर किसी को पार्टी की मजबूती के लिए काम करना चाहिए।