सरकार IRCTC में करीब 15 से 20 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रही है। यह बिक्री ओएफएस के जरिए की जाएगी। साथ ही सरकार इस लेनदेन को कम से कम किस्तों में पूरा करना चाहती है। पिछले महीने निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) ने आईआरसीटीसी में बिक्री के प्रबंधन के लिए 10 सितंबर तक व्यापारी बैंकरों से बोलियां आमंत्रित की थी। हालांकि, इसने रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) में प्रस्ताव पर हिस्सेदारी की मात्रा का खुलासा नहीं किया था।
सरकार के पास है इतनी हिस्सेदारी
इसके बाद, 4 सितंबर को संभावित बोलीदाताओं के साथ एक पूर्व बोली बैठक आयोजित की गई थी। DIPAM ने अब अपनी वेबसाइट पर संभावित बोलीदाताओं द्वारा उठाए गए प्रश्नों पर अपनी प्रतिक्रिया पोस्ट की है। हिस्सेदारी की फीसदी से संबंधित एक एक प्रश्न के जवाब में DIPAM ने कहा था कि सांकेतिक प्रतिशत 15 फीसद से 20 फीसदी है। सटीक जानकारी चयनित व्यापारी बैंकरों के साथ साझा की जाएगी। सरकार के पास फिलहाल IRCTC में 87.40 फीसद हिस्सेदारी है। सेबी के सार्वजनिक होल्डिंग मानक को पूरा करने के लिए, सरकार को कंपनी में अपनी हिस्सेदारी को 75 फीसदी तक लाना होगा।
क्या करती है आईआरसीटीसी
बता दें कि ऑफर ऑफ सेल में कम से कम 25 फीसदी शेयर म्यूचुअल फंड और इंश्योरेंस कंपनियों जैसे इंस्टीट्यूशनल निवेशकों के लिए सुरक्षित रहते हैं। सरकार ने निजीकरण के एजेंडे में अभी आईआरसीटीसी सबसे ऊपर है। सरकार अपनी कई कंपनियों और बैंकों के निजीकरण की तैयारी में है। आईआरसीटीसी के पास टिकटों की बुकिंग, ट्रेनों में कैटरिंग और बोतलबंद पानी बेचने के एक्सक्लूसिव राइट्स हैं।
पिछले साल अक्टूबर में हुई थी सूचीबद्ध
अक्टूबर 2019 में आईआरसीटीसी ने अपना आईपीओ लॉन्च किया था। रिटेल निवेशकों और कर्मचारियों के लिए ये शेयर 10 रुपये के डिस्काउंट पर 310 रुपये में ऑफर किए गए थे, जबकि बाकी निवेशकों को ये शेयर 320 रुपये के पड़े थे। आईपीओ के जरिए सरकार ने करीब 645 करोड़ रुपये जमा किए थे और 12.6 फीसदी की हिस्सेदारी बेची थी।