शिवसेना नेता और महाराष्ट्र के मंत्री आदित्य ठाकरे ने बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी से उनके निवास पर मुलाकात की। महाराष्ट्र में शिवसेना द्वारा कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के साथ गठबंधन सरकार बनाने के बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहली बैठक है। शिवसेना ने इसे दोनों नेताओं के बीच एक नियमित बैठक करार दिया।
सूत्रों के मुताबिक, दोनों नेताओं ने वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर चर्चा की। राहुल गांधी के साथ बैठक के दौरान आदित्य ठाकरे के साथ सीएए और एनपीआर के मुद्दों पर भी चर्चा की। आदित्य ठाकरे इसके बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल से भी मिले और उनसे गठबंधन के सहयोगियों के बीच समन्वय को बेहतर बनाने के तरीकों पर चर्चा की।
गौरतलब है कि शिवसेना ने सोमवार को संसद परिसर में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा बुलाई गई विपक्षी बैठक में शिरकत नहीं की थी।
शिवसेना के 56 में से 35 विधायक असंतुष्ट : राणे
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे ने दावा किया है कि राज्य में सत्तारू़ढ़ शिवसेना के 56 में से 35 विधायक पार्टी नेतृत्व से असंतुष्ट हैं। हालांकि, भाजपा व राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के बीच गठबंधन के मुद्दे पर टिप्पणी से इन्कार करते हुए उन्होंने कहा कि इस पर भाजपा ही बात करेगी।
एक कार्यक्रम के दौरान शनिवार रात यहां मीडिया से बात करते हुए राणे ने कहा कि राज्य सरकार का प्रदर्शन संतोषषजनक नहीं है। उन्होंने महाराष्ट्र की सत्ता में भाजपा की वापसी का भरोसा जताते हुए कहा कि भाजपा के 105 विधायक हैं, जबकि शिवसेना के सिर्फ 56 हैं और उनमें से भी 35 विधायक असंतुष्ट हैं। ठाकरे सरकार ने किसान कर्जमाफी की घोषणा की है। वह भी खोखली साबित हो रही है, क्योंकि इसकी कोई समय सीमा नहीं है। किसी को भी नहीं पता कि इस वादे का कब क्रियान्वयन किया जाएगा।
उन्होंने गत गुरुवार के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के औरंगाबाद दौरे का उल्लेख करते हुए कहा कि वह बिना किसी योजना या क्षेत्र के लिए राशि की घोषणा के ही वापस लौट गए। राणे ने कहा, ‘हम ऐसी सरकार से और क्या उम्मीद कर सकते हैं? वे सरकार चलाना नहीं जानते। उन्हें सरकार बनाने में ही पांच सप्ताह से ज्यादा लग गए। इससे जाहिर होता है कि वे सरकार किस तरह चलाएंगे।’
उल्लेखनीय है कि कभी शिवसेना और कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे राणे ने गत वषर्ष 15 अक्टूबर को अपनी पार्टी महाराष्ट्र स्वाभिमान पक्ष का भाजपा में विलय कर दिया था। इससे पहले वषर्ष 2018 में वह भाजपा के समर्थन से राज्यसभा सदस्य चुने गए थे।