सोनीपत। हुक्का पंचायतों से हरियाणा की देश में अलग पहचान है। हुक्का पंचायत से अभी तक एकता का संदेश भी दिया जाता था और यह परंपराएं 100 साल से ज्यादा पुरानी है। लेकिन, कोरोना वायरस ने हरियाणा की यह 100 साल पुरानी हुक्का परंपरा को अचानक बदल दिया है। जहां अभी तक पंचायत में एक ही हुक्का रखकर एक-दूसरे की ओर घुमाकर बुजुर्ग पीते हुए दिखाई देते थे। वहीं अब गांवों में बुजुर्ग आसपास बैठते जरूर हैं, लेकिन हर कोई अपने अलग-अलग हुक्के को रखकर दम लगाता हुआ दिखाई दे रहा है।
हरियाणा में हुक्के को एक अलग पहचान मिली है, क्योंकि यहां हुक्का पंचायतों में बड़े-बड़े मामले आसानी से निपटा दिए जाते हैं। इसलिए यहां की हुक्का पंचायतों से एकता का संदेश भी दिया जाता है, जिसमें सैकड़ों लोग भी एक साथ बैठकर हुक्का पीते हुए दिखाई देते हैं। अब अचानक ही गांवों में कुछ अलग नजारा दिखाई देने लगा है। जहां बुजुर्ग एक साथ बैठते जरूर हैं और वह समस्याओं को लेकर खूब चर्चा भी करते हैं। लेकिन वहां कुछ बदला हुआ दिखाई देता है तो हुक्का सभी का अलग-अलग होता है। यह बदलाव कोरोना वायरस के कारण हुआ है, जिसमें शहर से लेकर गांवों तक हर कोई जागरूक होता दिख रहा है और एहतियात भी बरत रहा है। गांवों में एहतियात बरतते हुए ही बुजुर्गों ने सामूहिक की जगह अलग-अलग हुक्का रखकर पीना शुरू कर दिया है।
गन्नौर के गुमड़ में बुजुर्ग रामसिंह, होशियार सिंह, ईश्वर सिंह, अतर सिंह, करतार सिंह, सूरत सिंह, रामफल, रविंद्र एक साथ जरूर बैठे हुए थे, लेकिन वह सभी अलग-अलग हुक्के में दम लगा रहे थे। बुजुर्गों ने कहा कि वह 80 साल तक के बसंत देख चुके हैं और उनके बुजुर्ग भी उनको बताते थे कि पंचायतों में एक साथ बैठकर हुक्का पीने की परंपरा काफी पुरानी चल रही है।
लेकिन पहली बार कोरोना वायरस के कारण यह परंपरा बदलती दिख रही है। बुजुर्ग कहते हैं कि हमारी याद में किसी बीमारी के कारण इस तरह के हालात नहीं हुए कि सरकार को सबकुछ बंद करना पड़ा हो। ऐसा वह पहली बार देख रहे हैं और कोरोना वायरस से बचाव के लिए हर किसी को एहतियात बरतने की बात कहते हैं। जिससे इस बीमारी को फैलने से रोकने में सहयोग किया जा सके और लोगों को बचाया जा सके।