हरियाणा में 108 नए न्यायिक अधिकारी संभालेंगे कार्यभार, 15.26 लाख लंबित मामलों के बीच बड़ी पहल

हरियाणा की न्यायिक व्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 108 नव-नियुक्त न्यायिक अधिकारी जल्द ही राज्यभर की अदालतों में कार्यभार संभालेंगे। इन अधिकारियों का यह आगमन ऐसे समय में हो रहा है जब हरियाणा की अदालतों में 15.26 लाख से अधिक मामले लंबित हैं, जिनमें से 11,00,725 आपराधिक मामले सीधे तौर पर जीवन और स्वतंत्रता से जुड़े हैं।

ये सभी अधिकारी एक वर्ष के इंडक्शन प्रशिक्षण कार्यक्रम को पूर्ण करने के बाद 7 फरवरी को आयोजित होने वाले दीक्षांत समारोह में औपचारिक रूप से अदालतों की जिम्मेदारी ग्रहण करेंगे। यह कार्यक्रम चंडीगढ़ स्थित न्यायिक अकादमी के सभागार में आयोजित होगा, जहां प्रशिक्षण कक्षाओं से अदालतों की बेंच तक की उनकी यात्रा का औपचारिक समापन होगा।

समारोह में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह के शामिल होने की संभावना है। कार्यक्रम की अध्यक्षता पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा करेंगे। इस अवसर पर अकादमी के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी सहित उच्च न्यायालय के अन्य न्यायाधीश भी उपस्थित रहेंगे।

चंडीगढ़ न्यायिक अकादमी, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शील नागू के संरक्षण में कार्य करती है, जबकि जस्टिस सेठी इसके बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष हैं।

राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड के आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा में लंबित मामलों का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा आपराधिक मामलों का है, जो न्यायिक तंत्र पर बढ़ते दबाव को दर्शाता है। न्यायिक अधिकारियों की यह नई खेप न्यायालयों में लंबित मामलों के निपटारे की गति बढ़ाने में सहायक मानी जा रही है।

लंबित मामलों की संख्या केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे हजारों परिवारों की वर्षों से चल रही कानूनी लड़ाइयां छिपी हैं। पीढ़ी दर पीढ़ी चलने वाले मुकदमे संबंधित पक्षों पर आर्थिक और मानसिक बोझ डालते हैं। न्याय में देरी, न्याय से वंचित होने के समान मानी जाती है, जिससे आम नागरिकों का न्याय प्रणाली पर विश्वास भी प्रभावित होता है।

हरियाणा में कुल 21 सत्र न्यायालय प्रभाग हैं। लंबित मामलों की अधिकता के कारण सुनवाई में लंबे अंतराल और वर्ष में कम सुनवाई जैसी समस्याएं सामने आती हैं। इसके परिणामस्वरूप जेलों में विचाराधीन कैदियों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।

ऐसे परिदृश्य में 108 नए न्यायिक अधिकारियों का अदालतों में प्रवेश न्यायिक व्यवस्था को गति देने और जनता को त्वरित न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

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