हरियाणा के पलवल के छांयसा में 15 दिनों में 12 मौतें, दूषित पानी और वायरल हेपेटाइटिस की आशंका

पलवल (हरियाणा): हरियाणा के पलवल जिले के छांयसा गांव में पिछले 15 दिनों में कम से कम 12 लोगों की मौत ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। प्रारंभिक जांच में इन मौतों का संबंध गंभीर लिवर संबंधी जटिलताओं, विशेष रूप से वायरल हेपेटाइटिस और संभावित रूप से दूषित पेयजल से जोड़ा जा रहा है।

स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, ये मौतें जनवरी के अंत से फरवरी के मध्य के बीच हुईं। मृतकों में पांच बच्चे भी शामिल हैं। सात मौतें 27 जनवरी से 11 फरवरी के बीच दर्ज की गईं, जिनमें से चार मामलों में तीव्र हेपेटाइटिस या लिवर फेल्योर की पुष्टि हुई है। मृतकों की आयु 9 से 65 वर्ष के बीच बताई गई है।

गांव में जांच और चिकित्सा शिविर

छांयसा, जिसकी आबादी लगभग 5,700 और करीब 865 परिवार हैं, में 31 जनवरी को पीलिया से संबंधित मौतों की पहली सूचना मिली थी। इसके अगले दिन एक रैपिड रिस्पॉन्स टीम तैनात की गई। तब से गांव में मेडिकल कैंप, घर-घर सर्वे और ग्रामीणों की स्क्रीनिंग की जा रही है।

पलवल की मुख्य चिकित्सा अधिकारी सतींदर वशिष्ठ ने बताया कि अब तक लगभग 1,500 लोगों की जांच की जा चुकी है, जिनमें मृतकों के संपर्क में आए लोग भी शामिल हैं। करीब 800 ओपीडी परामर्श किए गए और रक्त नमूनों की जांच हेपेटाइटिस A, B, C और E के लिए की गई।

210 लोगों के रक्त परीक्षण में हेपेटाइटिस B के दो और हेपेटाइटिस C के नौ मामले पॉजिटिव पाए गए, जबकि हेपेटाइटिस A और E के सभी नमूने नेगेटिव रहे। स्क्रब टायफस की रिपोर्ट का इंतजार है। तीन मरीजों को अस्पताल में भर्ती किया गया है और उनकी स्थिति स्थिर बताई गई है।

पानी के नमूनों में बैक्टीरिया

अब तक एकत्र किए गए 107 घरेलू पानी के नमूनों में से 23 गुणवत्ता जांच में फेल पाए गए, जिनमें बैक्टीरिया की मौजूदगी और क्लोरीन की कमी पाई गई। एक अन्य परीक्षण में भंडारण टैंकों में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया मिले। कई नमूनों में क्लोरीन पूरी तरह अनुपस्थित था, जिसके बाद सुधारात्मक कदम उठाए गए।

गांव के लोग जलापूर्ति, भूमिगत टैंकों और टैंकरों पर निर्भर हैं। अनियमित सफाई और टैंकों के अपर्याप्त कीटाणुशोधन को जलजनित संक्रमण के जोखिम का प्रमुख कारण माना जा रहा है। स्थिति को देखते हुए पड़ोसी इलाकों से आरओ से शुद्ध पानी भी मंगाया गया है।

एहतियाती कदम और जांच जारी

प्रशासन ने पानी को शुद्ध करने के लिए लगभग 15,000 हैलोजन टैबलेट वितरित की हैं और एक हेल्पलाइन (01275-240022) भी शुरू की गई है। लेप्टोस्पायरोसिस की जांच नेगेटिव आई है और पशु चिकित्सा निरीक्षण में भी पशुओं से संक्रमण की संभावना से इनकार किया गया है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मौतों के सटीक कारण का पता लगाने के लिए चिकित्सा, पर्यावरण और व्यवहार संबंधी सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। हालात सामान्य होने तक निगरानी और मेडिकल कैंप जारी रहेंगे।

विशेषज्ञों का कहना है कि हाल ही में मध्य प्रदेश के इंदौर में जहरीले पानी से हुई मौतों के बाद देशभर में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं, ऐसे में इस मामले की जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

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