चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने प्रदेश में आवारा कुत्तों से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब सभी नगरपालिकाओं और जिलों में 24×7 हेल्पलाइन शुरू की जाएगी, जहां कुत्तों के काटने, बचाव कार्य, और पशुओं को छोड़ने से संबंधित शिकायतें दर्ज कराई जा सकेंगी।
शुक्रवार को मुख्य सचिव अनूराग रस्तोगी ने उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में यह निर्देश जारी किए, ताकि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पूरी गंभीरता और समयबद्ध तरीके से पालन हो सके। उन्होंने कहा कि विभागों को “सटीकता, संवेदनशीलता और पूर्ण जवाबदेही” के साथ काम करना होगा, ताकि जनता की सुरक्षा और पशु कल्याण दोनों सुनिश्चित हो सकें।
बड़े डॉग शेल्टर बनेंगे, CCTV और मेडिकल सुविधाओं से लैस
सरकारी प्रवक्ता के अनुसार, नगर निकायों और ग्रामीण स्थानीय अधिकारियों को बड़े पैमाने पर डॉग शेल्टर शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। इन शेल्टर्स में—
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CCTV निगरानी
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मेडिकल सुविधाएं
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प्रशिक्षित स्टाफ
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कम से कम 5,000 कुत्तों की क्षमता
सुनिश्चित की जाएगी।
मुख्य सचिव ने कहा कि नसबंदी, टीकाकरण, टैगिंग और नियमित पशु चिकित्सा देखभाल को Animal Birth Control Rules के अनुरूप करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, पर्याप्त पकड़ने वाली टीमें और डिजिटल रिकॉर्ड-कीपिंग सिस्टम भी लागू किए जाएंगे।
नगरपालिकाएं हर वार्ड में फीडिंग ज़ोन भी चिन्हित करेंगी और पशु कल्याण संगठनों के साथ मिलकर सुरक्षित और स्वच्छ तरीके से कुत्तों को भोजन उपलब्ध कराया जाएगा।
राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों से आवारा पशु हटाने पर भी जोर
बैठक में राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य राजमार्गों और एक्सप्रेसवे से आवारा मवेशियों को हटाने पर विशेष ध्यान दिया गया।
NHAI, PWD (B&R), परिवहन विभाग, नगर निकाय और पशुपालन विभाग को संयुक्त अभियान चलाकर—
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संवेदनशील स्थानों की पहचान
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मवेशियों को सुरक्षित पकड़ना
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पंजीकृत गौशालाओं या शरण स्थलों में स्थानांतरित करना
के निर्देश दिए गए हैं।
इन शरण स्थलों में पशुओं के लिए इलाज, भोजन और पानी की उपलब्धता अनिवार्य होगी।
हाईवे पेट्रोल और कंट्रोल रूम से रहेगी सीधी निगरानी
सभी जिलों को निर्देशित किया गया है कि—
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पुलिस थानों और जिला कंट्रोल रूम से लिंक हाईवे पेट्रोल टीमें 24 घंटे तैनात रहें
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हाईवे पर हेल्पलाइन नंबर प्रमुखता से प्रदर्शित किए जाएं
ताकि किसी भी घटना की तत्काल रिपोर्टिंग और कार्रवाई संभव हो सके।
सरकार का कहना है कि इन प्रयासों से न केवल सड़क सुरक्षा में सुधार होगा बल्कि पशु क्रूरता की घटनाओं में भी कमी आएगी, जिससे समाज में बेहतर संतुलन स्थापित किया जा सकेगा।